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महाराष्ट्र – कायम रहेगा याराना !

20 September, 2014

हरियाणा की कहानी बीजेपी दोहराना तो महाराष्ट्र में भी चाहती थी, लेकिन शायद भाजपा नेताओं को समय रहते इस बात का भान हो गया कि महाराष्ट्र में शिवसेना से 25 साल पुराना याराना तोड़ कर अकेले दम पर कांग्रेस और एनसीपी के साथ ही शिवसेना का भी सामना करना, उसके महाराष्ट्र की सत्ता में काबिज …और पढ़ें

द्वारा:Deepak Tiwari
टॉपिक:राजनीति

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धोनी को बिरयानी क्यों खाने दे होटल

20 September, 2014

धोनी को बिरयानी क्यों खाने दे होटल वेद विलास उनियाल वो भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हैं इसलिए  उनके पास राष्ट्रपति के हाथों पद्म पुरस्कार लेने का वक्त नहीं होता, या वो इस पुरस्कार को अहमियत नहीं देना चाहते। वो एक जाने माने क्रिकेटर हैं इसलिए वो किसी होटल में घर से लाई बिरयानी खाने …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:समाज

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खंडित देव प्रतिमाएं

17 September, 2014

प्रतिमा और मूर्ति में बड़ा फर्क होता है, प्रतिमा में प्रति शब्द है मतलब किसी की कार्बन कापी, कार्बन कापी कभी मूल नहीं हो सकती। दूसरी ओर मूर्ति का अभिप्राय है साक्षात वही अर्थात ओरिजनल। जब प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है तो वह मूर्ति बन जाती है, साक्षात देवी-देवता। न्यायाधीशों को सम्मानपूर्वक हम …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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अमर उजाला ब्लॉग

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सानिया का बेहतर जवाब ….

16 September, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

सानिया इससे अच्छा जवाब और क्या दे सकती थी।  अमेरिकी ओपन मिक्सड जीतकर उन्होंने इस खिताब को नए राज्य तेलंगाना के नाम कर दिया।  सानिया ने भारत को बहुत खूबसूरत पल दिलाए हैं। इससे पहले जब महेश भूपति के साथ उन्होंने आस्ट्रेलियन और फ्रेंच डबल ओपन का खिताब जीतकर वह स्टार खिलाड़ी बनी थीं। लेकिन …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:खेल

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सांस्कृतिक टकराव….

14 September, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

भोजन करने के बाद बल्लू और दीक्षा दुआरे आकर टहलने लगे। शहरी जिंदगी का यह अहम हिस्सा होता है खाने के बाद टहलना। जबकि गांवों में कहावत है कि भोजन के बाद…। यह कहावत चाहे जितनी अश्लील हो लेकिन गांवों की यह हकीकत है कि इनके पास मनोरंजन के नाम पर इसके सिवा कुछ नहीं …और पढ़ें

टॉपिक:साहित्य

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विखंडित चेहरे वाला भगवान

12 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

एक विकासशील देश के पूर्व प्रधानमंत्री की मौत की खबर सुनकर दुनिया के देशों पर अपनी दादीगीरी की धौंस जमाने वाले देश के राष्ट्रपति की चिंताएं बढ़ गईं। उस वक्त वह सोने जा रहा था, जब उसे यह समाचार मिला कि तरभा देश के पूर्व प्रधानमंत्री वरा का देहांत हो गया। उसकी चिंता का कारण …और पढ़ें

टॉपिक:साहित्य

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रीडर्स ब्लॉग

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आयुर्वेद में एंटीबायोटिक गुण वाली औषधियां

23 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

आयुर्वेद में एंटीबायोटिक गुण वाली औषधियां आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग से बैक्टीरिया में resistance उत्पन्न नहीं होता है और यही इसका सबसे प्रभावी एंटीबायोटिक गुण है. आयुर्वेद विज्ञान में मनुष्य को स्वस्थ रखने के लिए अनेक औषधियों का वर्णन है. इन्हीं औषधियों से आजकल विदेशी कंपनियां उनके केमिकल निकाल कर दवा बनाती हैं और हमसे …और पढ़ें

द्वारा:Dr.Swastik Jain
टॉपिक:स्वास्थ्य

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मुल्क से बढ़कर न खुद को समझें हम,

23 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

                      ”मुख्तलिफ  ख्यालात भले रखते हों ,मुल्क से बढ़कर न खुद  को समझें हम, बेहतरी हो जिसमे अवाम की अपनी ,ऐसे क़दमों को बेहतर  समझें हम. …………………………………………………………………………………………… है ये चाहत तरक्की की राहें आप और हम मिलके पार करें , जो सुकूँ साथ मिलके चलने में इस हकीक़त को ज़रा समझें हम . …………………………………………………………………….. कभी हम …और पढ़ें

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Kashmir

स्कॉटलैंड और कितने पाकिस्तान

22 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह ने कश्मीर, तिब्बत, बलूचिस्तान से लेकर उत्तर पूर्व भारत को चर्चाओं में खड़ा कर दिया। स्कॉटलैंड के लोगों ने साबित कर दिया कि लोकतान्त्रिक मूल्यों और समझ के मामले में उनका स्तर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की सोच से कितनी उंचाई पर है। स्कॉटलैंड के लोगों की आजादी का आधार धार्मिक या …और पढ़ें

द्वारा:CA. Satyendra Hemanti

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अतिपरिचय अवज्ञा भवेत : प्रेरक प्रसंग

20 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

एक बार गोस्वामी तुलसीदासजी काशी में विद्वानों के बीच भगवत चर्चा कर रहे थे। तभी दो व्यक्ति – जो तुलसीदासजी के गाँव से थे , वहाँ आये। ऐसे तो वे दोनों गंगास्नान करने आये थे। लेकिन सत्संग सभा तथा भगवद वार्तालाप हो रहा था गोस्वामी तुलसीदास जी तो वे भी वहाँ बैठ गए। दोनो ने ने उन्हें पहचान लिया। …और पढ़ें

द्वारा:Vikram Ghosh
टॉपिक:आध्यात्म

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खुश रहना बहुत जरुरी है

18 September, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

जीना एक कला है आज के परिवेश में इसके मायने बदल गए हैं आज के समयांतर में जीना एक मज़बूरी या जरुरत बन गई है हर इंसान इतना ब्यस्त और कुण्ठित(Frustrated) हो गया है की उसका खुद का चेहरा उसे अजनबी लगने लगा है मन मस्तिस्क से उपजी सीलन इंसान की अंतरात्मा को खाती जा …और पढ़ें

टॉपिक:विचार

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