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फीचर्ड ब्लॉग

बेटी ही दिजो ….

27 January, 2015

पंद्रहवी जनगणना में जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक एक अच्‍छा संकेत यह है कि पिछले दस वर्षों में लिंगानुपात 933 से बढ़कर 940 हो गया है। ये लिंगानुपात वर्ष 1961 के बाद सर्वाधिक है। लिंगानुपात का मतलब प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्‍या से है। हरियाणा के झज्झर में लिंगानुपात सबसे कम 774 है। …और पढ़ें

द्वारा:Aman kumar
टॉपिक:विचार

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Doctor with stethoscope

स्वास्थ्य सेवाओं में अब आई.टी. क्रान्ति हो

27 January, 2015

चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं हमारे समाज का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है और स्वास्थ्य सेवाओं को कुशल तथा प्रभावी बनाने व इसके उचित प्रबंधन के लिए आज अनेक वैज्ञानिक उपाय प्रयोग में लाये जा रहे हैं। देश में प्रतिदिन हजारों अस्पताल लाखों रोगियों के समुचित उपचार के लिए उनसे ली गयी जानकारी के आधार पर …और पढ़ें

द्वारा:Dr.Swastik Jain
टॉपिक:स्वास्थ्य

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आया बसंत, आया बसंत।

27 January, 2015

आया बसंत, आया बसंत। मन दर्पण में छाया बसंत। राधा के सुर गाये बसंत, कान्हा के मन भाये बसंत। मीरा का विष प्याला बसंत, गिरधर और गोपाला बसंत। भ्रमरों के गुन गुन में बसंत पुष्पों की धुन सुन ऐ बसंत। प्रियतम का मुस्काना बसंत प्रेयसी पर छा जाना बसंत। यौवन पर शरमाया बसंत। माया की …और पढ़ें

टॉपिक:आध्यात्म

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अमर उजाला ब्लॉग

obama

ओबामा, दिलशाद की मौत और उम्मीदें

27 January, 201510 प्रतिक्रियाएँ »

ओबामा भारत आए। अच्छे मेहमान बने। मोदी के गले लगे। गणतंत्र दिवस परेड देखकर खुश हुए। तालियां बजाईं। शाहरुख खान का डायलॉग बोला, मिल्खा सिंह और मैरीकाम के योगदान को याद किया। हम सब बेहद प्रसन्न हैं कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को इतनी तवज्जो दी। लेकिन जिस बात पर सबसे ज्यादा गौर करने …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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pk

पीके- नई जुबान में कबीरबानी

22 December, 201437 प्रतिक्रियाएँ »

मेरे मन में तो बहुधा आता है, आपके मन में भी जरूर आता होगा कि कबीर आज जिंदा होते और अपनी उसी ठसक में बात करते जैसी पांच सौ साल पहले कही थी. तो क्या होता? मौजूदा दौर में इसकी कल्पना भी सिहरा देती है। कोई खुदा का नाम लेकर उनके पीछे पिल पड़ता तो …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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fish

मछली और मजहब

18 December, 20146 प्रतिक्रियाएँ »

एक छोटी मछली बहुत दुखी थी। मां रोज सुबह सजा संवार कर उसे स्कूल भेजती। यहां तक सब ठीक था। दुख उसके बाद शुरू होता। क्लास में टीचर उसे खड़ा कर लेती- बताओ भाप का इंजन किसने बनाया? वह चुपचाप सिर नीचे झुका लेती। उसे फटकार पड़ती। तमाचे पड़ते। वह खुद को दुनिया का सबसे …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:साहित्य

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रीडर्स ब्लॉग

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ओबामा, दिलशाद की मौत और उम्मीदें

27 January, 201510 प्रतिक्रियाएँ »

ओबामा भारत आए। अच्छे मेहमान बने। मोदी के गले लगे। गणतंत्र दिवस परेड देखकर खुश हुए। तालियां बजाईं। शाहरुख खान का डायलॉग बोला, मिल्खा सिंह और मैरीकाम के योगदान को याद किया। हम सब बेहद प्रसन्न हैं कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को इतनी तवज्जो दी। लेकिन जिस बात पर सबसे ज्यादा गौर करने …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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कन्या भ्रूणहत्या :सिर्फ शीघ्र सुनवाई हल नहीं

27 January, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ का कन्याभ्रूण हत्या को लेकर सुनवाई का समय निश्चित करना और लिंग अनुपात में आ रही कमी को लेकर चिंता जताना सराहनीय पहल है .आज कन्या भ्रूण हत्या जोरों पर है और लिंग-जाँच पर कानूनी रूप से प्रतिबन्ध लगाया जाना और इसे अवैध व् गैरकानूनी घोषित किया जाना भी इसे नहीं …और पढ़ें

टॉपिक:विचार

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general too

सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया !

27 January, 20154 प्रतिक्रियाएँ »

    सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया ! बेसुरी बदरंग उसके बिन है ये सारी दुनिया ! ……………………………………………………. इसकी किलकारी इसकी मुस्कानें अंगना में लाती बहारें , ले लो गोदी ज़िद करती है , तब बरसें ठंडी फुहारें , नन्हें हाथों से ये लुटाती है भोली-भली हज़ारों खुशियां ! सातों सुर …और पढ़ें

टॉपिक:समाज

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देखो हंस रहे हैं खेत खलिहान

27 January, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

देखो हंस रहे हैं खेत खलिहान , मीठी मधुर हवा संग कर रहे हों मधुर गान। आओ झूमे नाचे गाए आई है बहार। पीली -पीली सरसों से हुआ है ,  धरती का श्रृंगार। सुनहरे रंगो की छटा चारोँ ओर।  दिनकर की किरणों से चमके ,  चाँदनी सा जलाशयों का जल सतरंगी रंगों की छठा ,मंद …और पढ़ें

द्वारा:Ritu Asooja
टॉपिक:अन्य

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india2

बुंलद आवाज

27 January, 20152 प्रतिक्रियाएँ »

बुंलद थी आवाज,होशलो की उङान! थर थर काँपते थे, अग्रेजो के सिघासन।।  थका नहीं था रूका नहीं था, मा को आजाद करने चला था।       बुझते दीपको में ऊर्जा का संचार भरा था।।     नेताजी की दहाङ से , हिल गई बुनियादे थी!  शीष पर था ,नेता जी का परचम।  आजाद हिन्द का …और पढ़ें

टॉपिक:अन्य

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