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manhi

मांझी बिहार नहीं सिर्फ मखदमपुर के सीएम !

30 August, 2014

जीतन राम मांझी, ये बिहार के मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि बिहार में भाजपा के खिलाफ अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई के लिए पैदा हुए महागठबंधन के फिलहाल अघोषित तौर पर सबसे बड़े नेता हैं। आम चुनाव में करारी हार की जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले नीतिश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में सीएम …और पढ़ें

द्वारा:Deepak Tiwari
टॉपिक:अन्य

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दुनिया पूछ रही कौन हैं कमला

30 August, 2014

गुलदार से कोई नहीं लड़ पाता।  गुलदार पास आता है तो कोई कुछ नहीं कर पाता, जो करना होता है गुलदार को ही करना होता है। उसकी आक्रामक छवि, रफ्तार और हमलों में ज्यादा से ज्यादा इतना होता है कि आप थोड़ा दौड़ लें। कहा जाता है कि खुले में उसे देखने के बाद मन …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:समाज

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अमर उजाला ब्लॉग

shivraj

आत्मकथा शिवराज पाटिल की

1 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

भारतीय राजनेताओं में शिवराज पाटिल की उपलब्धियां और निरंतर कामयाबी  किसी में भी ईष्या का भाव जगा सकती है। बेशक जिन पदों पर वो सुशोभित रहे हैं, वहां कभी भी अपनी कोई बड़ी छाप वो नहीं छोड़ पाए, लेकिन  इससे उनके राजनीतिक सफर पर कोई फर्क नहीं पड़ा। महाराष्ट्र के खांटी नेताओं के विपरीत  एकदम …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:राजनीति

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geet1

गाथा नौछमी नारेणा की…

26 August, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

फिर नौ छमी नारैणा गीत की चर्चा है। एक गीत जन जन को किस तरह झकझोर सकता है, इसे उत्तराखंड के नौ छमी नारेणा गीत से इसे महसूस किया जा सकता है।  व्यवस्था से हताश, निराश समाज को इस गीत से अपनी अभिव्यक्ति की संजीवनी मिल गई थी। नेगीजी का कोई आयोजन हो तो उनके तमाम …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:विचार

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यूं नहीं फिसलती जुबान

25 August, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली के निर्भया मामले को मामूली घटना बता दिया तो बबाल मचना स्वाभाविक ही था। वह घटना बेशक देश की ऐसी कई घटनाओं में एक घटना थी, लेकिन  युवतियों बच्चियों की रक्षा के लिए खड़ा आंदोलन एक प्रतीक बन गया। जब ऐसी कोई घटना प्रतीक बन जाए तो उसे आप …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:राजनीति

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आत्मकथा शिवराज पाटिल की

1 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

भारतीय राजनेताओं में शिवराज पाटिल की उपलब्धियां और निरंतर कामयाबी  किसी में भी ईष्या का भाव जगा सकती है। बेशक जिन पदों पर वो सुशोभित रहे हैं, वहां कभी भी अपनी कोई बड़ी छाप वो नहीं छोड़ पाए, लेकिन  इससे उनके राजनीतिक सफर पर कोई फर्क नहीं पड़ा। महाराष्ट्र के खांटी नेताओं के विपरीत  एकदम …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:राजनीति

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मेरे लहू में है ,

1 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

कहने की नहीं हसरत ,मेरे लहू में है , सहने की नहीं हिम्मत ,मेरे लहू में है , खंजर लिए खड़ा है ,मेरा ही भाई मुझ पर , जीने की नहीं उल्फत ,मेरे लहू में है . ……………………………………………………………………….. खाते थे रोटी संग-संग ,फाके भी संग किये थे , मुश्किल की हर घडी से ,हम साथ …और पढ़ें

टॉपिक:अन्य

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“तारा शाहदेव-एक आदर्श नारी”

1 September, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

बहुत दिनों से देश में इस नाम की चर्चा है और मैंने भी समय मिलने पर कई न्यूज़  चैनल पर इस महान व्यक्तित्व को सुना,जिसके शरीर पर प्रताड़ना के चिन्ह स्पष्ट दृष्टिगोचर होते,किसी प्रकार से वह जान बचाकर वहां से निकली और सारे काले कारनामों का भंडा फोड़ उसने बाहर आकर किया,देश के शासन ,प्रशासन …और पढ़ें

द्वारा:P K DUBEY
टॉपिक:विचार

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politician-cartoon-in-india

‘बयान- वीर’ नेताओं की वीरता

30 August, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

  ‘बयान- वीर‘ नेताओं की वीरता  तारकेश कुमार ओझा     पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ राजनैतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक को अचानक ज्ञानोदय हुआ कि इस धरा पर बलात्कार तो तब से हो रहे हैं, जब से यह सृष्टि बनी है। उनके मुताबिक बलात्कार पहले भी होते रहे हैं , आज भी हो रहे हैं और …और पढ़ें

द्वारा:tarkeshkumarojha
टॉपिक:समाज

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Prayer-To-God

ये दुआ करना

30 August, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

महरूम हैं जो सूरज की रोशनी से अँधियारों से निकल आयें सहम कर खौफजदा दुबके बैठे हैं जो निडर बन बेखौफ हो जाएँ ये दुआ करना भूखे पेट मेहनत कर दूसरों को खिलते हैं जो दो वक्त की रोटी जुटा पाएँ किसी के रहमोकरम पे जी रहे हैं जो आत्मनिर्भर बन जाएँ ऊंचे ओहदों पे …और पढ़ें

द्वारा:sahil verma
टॉपिक:समाज

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