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एपीजे अब्दुल कलामः छात्रों को खुद बताई थी अपनी ईमेल आइडी…!!

29 July, 2015

  एपीजे अब्दुल कलामः छात्रों को खुद बताई थी अपनी ईमेल आइडी…!! साधारण डाक और इंटरनेट में एक बड़ा फर्क यही है कि डाक से आई चिट्ठियों की प्राप्ति स्वीकृति या आभार व्यक्त करने के लिए भी आपको खत लिखना और उसे डाक के बक्से में डालना पड़ता है। लेकिन इंटरनेट से मिलने वाले संदेशों …और पढ़ें

द्वारा:tarkeshkumarojha
टॉपिक:यादें

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ये आपके वायदों को साकार कर रहे हैं…

20 July, 2015

यह वार्तालाप पर अधारित एक व्यंग्य है   लोकसभा के मॉनसून सत्र में विपक्ष के सवालों का जवाब सरकार ने ढूंढ लिया है. अभी तो ललितगेट और व्यापम पर खामोश पीएम लोकतंत्र की मंदिर में विपक्ष की सवालों का जवाब देंगे. राजस्थान की महारानी वसुंधरा और एमपी के राजा शिवराज सिंह चौहान का बचाव पीएम …और पढ़ें

द्वारा:MUNESHWAR KUMAR
टॉपिक:हास्य

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क्रिकेट का ‘ विकास’ …!!

19 July, 2015

​हास्य – व्यंग्य ————————- क्रिकेट का ‘ विकास’ …!!   नो डाउट अबाउट दिस … की तर्ज पर दावे के साथ कह सकता हूं कि अपना देश विडंबनाओं से घिरा है। हम भारतवंशी एक ओर तो विकास – विकास का राग अलाप कर राजनेता से लेकर अफसरशाही तक की नींद हराम करते हैं लेकिन जब …और पढ़ें

द्वारा:tarkeshkumarojha
टॉपिक:हास्य

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अमर उजाला ब्लॉग

चलने लगी है अच्छाई की बयार….

3 August, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अंतिमा सिंह कहते हैं किसी व्यक्ति का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता। लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था कि देश या समाज में सुधार के लिए किसी को तो बलिदान देना ही पड़ेगा, भले उससे खुद को फायदे न मिले लेकिन आगे आने वाली पीढ़ी को उसका फायदा जरूर मिलेगा, तो यह बात सोलह आने सच …और पढ़ें

द्वारा:अंतिमा सिंह
टॉपिक:समाज

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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में…..

22 July, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अंतिमा सिंह लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम्हें तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में मशहूर शायद बशीर बद्र ने ये लाइनें तब लिखी थी जब मेरठ में दंगाइयों ने उनका घर जला दिया था। यही लाइनें आज मुजफ्फरनगर कांड पर भी फिट बैठती हैं। कुछ दिनों पहले खाप रिसर्च के दौरान मुजफ्फरनगर …और पढ़ें

द्वारा:अंतिमा सिंह
टॉपिक:समाज

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शीला के वो पचास साल

30 May, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

दिल्ली के “शीला” टाकीज में विजयानंद चंदोला ने अपने पचास साल गुजारे। गुजारे क्या, शीला टाकीज ही एक तरह से उनकी जिंदगी हो गई। एक बार यहां आए तो फिर कहीं गए नहीं। समय के साथ दिल्ली की आबोहवा बदली, पर वो नहीं बदले। गुरबत ने घर से पलायन करने को मजबूर किया। कहां जाते। …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:मनोरंजन

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रीडर्स ब्लॉग

घाघ

3 August, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]घाघ (सं0-1753) अन्तर्वेद के प्रसिद्ध कवि हैं। घाघ अपनी कथोक्तियों, लोकोक्तियों तथा नीति सम्बंधी रचनाओं के कारण लोकविख्यात हैं। इनकी रचनाएँ सामाजिक और ग्रामीण बोलचाल की भाषा में हैं| कृषि पंडित एवं व्यावहारिक पुरुष होने के नाते घाघ का नाम भारतवर्ष के, विशेषत: उत्तरी भारत के, कृषकों के जिह्वाग्र पर रहता है। चाहे …और पढ़ें

द्वारा:YATINDRA NATH CHATURVEDI
टॉपिक:अन्य

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संसद और विधानसभाएं लोकतंत्र के मंदिर हैं

3 August, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

दागी नेताओं को बचाने हेतु लाए गए अध्यादेश की वापसी का श्रेय लूटने के लिए देश के दोनों प्रमुख दलों- कांग्रेस और भाजपा- में मची होड़ कुछ दिन पूर्व देशवासियों ने देखी थी। लेकिन राजनीति की कालिख मिटाने की इन दोनों दलों की इच्छाशक्ति और ईमानदारी का असल इम्तिहान तो अब होने वाला है। पांच …और पढ़ें

द्वारा:vijyender Sharma
टॉपिक:राजनीति

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दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से B.Ed की मान्यता के सबंध में

3 August, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

महोदय मैने इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्व विद्यालय नई दिल्ली से B.Ed कोर्स किया है। मैने जूनियर हाई स्कूल का आवेदन किया है।, IGNOU का B.Ed का कोर्स NCTE ,UGC से मान्यता है। महोदय बताये की कांसेल्लिंग में मौका मिलेगा क्या ? IGNOU से B.Ed हर वर्ष लाखो छात्र कर रहे है। इस डिग्री का …और पढ़ें

द्वारा:amit2716

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अमेरिकी प्राध्यापक का दावा ः बंगलादेश की मुक्तियुद्ध के दौरान पाक सेना ने किया था एक करोड़ हिंदुओं का कत्लेआम …

3 August, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अमेरिकी प्राध्यापक का दावा ः बंगलादेश की मुक्तियुद्ध के दौरान पाक सेना ने किया था एक करोड़ हिंदुओं का कत्लेआम …!! 1971 के बंगलादेश मुक्तियुद्ध से पहले  पाकिस्तानी सेना ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर नरसंहार किया था। बंगाली हिंदुओं को इसका खास टार्गेट बनाया गया था। इसके चलते असहाय हालत में  लगभग एक करोड़ …और पढ़ें

द्वारा:tarkeshkumarojha
टॉपिक:यादें

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भोपाल से अहमदाबाद आते-आते मिट गई दूरियां!-कितनी -सबने देखी

3 August, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

भोपाल से अहमदाबाद आते-आते मिट गई दूरियां!-कितनी -सबने देखी भाजपा में आजकल बहुत जोश है और बहुत शान से ये मोदी के झंडे तले २०१४ के चुनाव जीतने की होड़ में लगे हैं किन्तु बड़ा अफ़सोस होता है कि भगवन राम के नाम को लेकर सत्ता हासिल करने वाले और आगे सत्ता हासिल करने के …और पढ़ें

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