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प्रेमिका ने लिख भेजीं अंतरंग बातें

22 October, 2014

“काश! वो ट्रेन गाजियाबाद रुकती और वो मिल जाती” से आगे… कल मैं दिल्ली से वापस लौट आई। कहने को अकेले आई हूं, सबने देखा भी, लेकिन जो कोई नहीं देख पाया वो सारी बातें इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं। कितना भी कोशिश करूं, समेट नहीं सकती। समझ नहीं आ रहा कि शुरू कहां से करूं। …और पढ़ें

टॉपिक:कला

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दिल्ली का शहीद बनाम जंगल का शहीद

20 October, 2014

देश की राजधानी दिल्ली में कुछ गुंडों ने एक पुलिस के सिपाही को गोली मार दी. उस समय वह सिपाही गश्त पर था और गुंडों को थाने ले जा रहा था. कुछ राजनीतिक बयानबाज़ियों के बाद दिल्ली की सरकार की ओर से उसके परिजनों को एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई है. मानना …और पढ़ें

द्वारा:विनोद वर्मा
टॉपिक:राजनीति

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अड़े रुखां तले वी सेक लागै सै…

20 October, 2014

( अड़े रुखां तले वी सेक लागै सै…मूल विचार दुष्यंत कुमार- यहां दरख्तों के साये में भी धूप लगती है) हरियाणा देवभूमि का द्वार कहलता है। प्राचीन मान्यता है कि यह भूमि यक्षों से रक्षित है। अरंतुक और तरुंतक यक्ष और उनकी मह‌िला साथी उलूकमेखला अजन‌बीयों के ल‌िए बाधा पैदा करती है। यहां प्रवेश के …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:राजनीति

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अमर उजाला ब्लॉग

modi-shah

जादू चलता नहीं चलाया जाता है…

21 October, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

हिंदी में एक शब्द है जादू। बोलचाल में अक्सर प्रयोग किया जाता है कि फलां का जादू चल गया। फलां का जादू बरकरार है। फला का जादू नहीं चला। जब व्यक्ति के समझ में नहीं आने वाली घटनाएं हो जाती हैं तो उसे जादू कह दिया जाता है। इस एक शब्द में बहुत सारी कमियों …और पढ़ें

टॉपिक:राजनीति

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Rekha80

रेखा को देखा …

15 October, 201438 प्रतिक्रियाएँ »

अरसे बाद ही सही छोटे पर्दे पर बड़ी रेखा को देखा। दिल बाग.बाग हो गया। रेखा सिर्फ एक दिलफरेब अदाकारा भर नहीं हैं। भारत में मोहब्बत के दो सबसे बड़े पैरोकारों में से वह एक हैं। अमृता प्रीतम ताउम्र इश्क की सबसे बड़ी पैरोकार बनी रहीं। लेखनी में इश्क कथनी में इश्क, करनी में इश्क, …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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Shailesh_Matiyani

दबे, कुचले और उपेक्षितों के चितेरे थे शैलेश मटियानी

15 October, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

14 अक्तूबर जन्म दिवस पर विशेष भारतीय समाज के दबे, कुचले, शोषित, उपेक्षित और हाशिए के निम्न वर्गीय लोगों तथा उत्तराखंड की संस्कृति के जीवंत चितरे शैलेश मटियानी का मंगलवार को जन्मदिन था। पहाड़ में जन्मे मटियानी को पहाड़ सा दर्द पूरे जीवन मिला। जब उनकी कहानियां धर्मयुग जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित होने लगी …और पढ़ें

टॉपिक:विचार

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रीडर्स ब्लॉग

light

ईश्वर को लगायें भोग, दूर करें दरिद्रता

25 October, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अगर आप इस लेख को पढ़ रहे हैं तो मैं मुस्कुरा रहा हूँ | आप भी मुस्कुराइए की आप इक्षुक हैं की बात कहाँ जाने वाली है! आज विभिन्न समाचार के चैनलों पर इधर उधर भाग रहा था, एक जगह रिमोट ने काम करना बंद कर दिया और किसी निजी समाचार चैनल पर रुक गया …और पढ़ें

द्वारा:Prateek
टॉपिक:हास्य

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modi-shah

कायम है मोदी मैजिक !

21 October, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

हरियाणा और महाराष्ट्र में राजनीतिक जमीन तलाशने वाली भाजपा को न सिर्फ इस चुनाव में जमीन मिली बल्कि इस जमीन में कमल भी खूब खिले। हरियाणा की मिट्टी तो भाजपा को इतनी भायी की 2005 में दो और 2009 में सिर्फ चार सीटें जीतने वाली भाजपा ने 47 सीटों पर जीत हासिल करते हुए अपने …और पढ़ें

द्वारा:Deepak Tiwari
टॉपिक:राजनीति

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ग़ज़ल

21 October, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

दर्द,गम अश्क, तड़प मर्ज में शामिल तो हो। पुरख़तर जिस्त मेरी मौत से जाहिल तो हो। जीत जाऊंगा सभी खेल, तमाशे मैं भी, ज़िंदगी मेरी जरा मेरे मुकाबिल तो हो। कब तलक हाथ संभालेंगे हमारे साथी, क्या करें रूक के, कोई एक मसाइल तो हो। सौंप दूंगा मैं सभी हर्फो-हवादिस अपने, मेरा बेटा मेरे किर्दार …और पढ़ें

द्वारा:suneelsamvedi
टॉपिक:साहित्य

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पोशाकों में छिपा व्यक्तित्व

20 October, 20149 प्रतिक्रियाएँ »

 आधुनिक मानव का पोशाकों में छिपा व्यक्तित्व ,   कहतें हैं ,मनुष्य के व्यक्तित्व की पहचान उसकी    पोशाक से होती है।            परन्तु आधुनिक मानव की पोशाकों का क्या                    कहना ,किसी भी मानव का व्यक्तित्व सिमट कर रह गया है ,उसकी  …और पढ़ें

द्वारा:Ritu Asooja

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तभी समझो दिवाली है

20 October, 20142 प्रतिक्रियाएँ »

जलाओ  दीप  जी  भर कर, दिवाली    आज   आई   है। नया     उत्साह   लाई    है, नया    विश्वास   लाई    है।   इसी   दिन  राम   आये  थे, अयोध्या    मुस्कुराई    थी। हुआ  था  राम  का स्वागत, खुशी  चहुँ  ओर  छाई  थी।   मना  था  जश्न  घर-घर  में, उदासी  खिलखिलाई   थी। अँधेरा    चौदह   बर्षों  का, उजाला  ले …और पढ़ें

द्वारा:Anand Vishvas
टॉपिक:साहित्य

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