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Polling officer checks an EVM at a distribution centre in Agartala

वोट भाजपा को लेकिन मुहर लगेगी हाथ पर…

24 April, 2014

उस समय संभवत: विधानसभा का चुनाव हो रहा था। मैं सातवीं कक्षा में पढ़ रहा था। घर से करीब चार किलोमीटर दूर अंग्रेजों के जमाने के बनवाए गए जूनियर हाईस्कूल में पैदल ही पढ़ने जाता था। स्कूल और घर के बीच रास्ते में लंभुआ बाजार पढ़ता था। अब यह तहसील है। उस समय यहां पर …और पढ़ें

टॉपिक:राजनीति

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aaurveda

आयुर्वेद के नाम पर भ्रामक विज्ञापन

24 April, 2014

भारत में आज कल विज्ञापन का हर जगह बोलबाला है और निसंदेह उपभोक्ता भी इससे काफी हद तक प्रभावित हो रहे है. ऐसे विज्ञापनों और वेबसाइटों में आयुर्वेद के नाम पर दावा और वादा किया जाता है कि हमारे हर्बल उत्पाद; स्लिमिंग और वजन घटाने के इलाज में नंबर १ , गठिया, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, …और पढ़ें

द्वारा:Dr.Swastik Jain
टॉपिक:विचार

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money-happiness

हवाला के हवाले से

19 April, 2014

हवाला की फिर हवा बही है। मीट के एक एक्सपोर्टर पर हवाला कारोबार के जरिए करोड़ों की काली कमाई विदेश से देश में लाने, बाहर ले जाने का आरोप है। आरोप है कि हवाला कारोबारी से यूपीए सरकार के चार मंत्रियों के काफी करीबी ताल्लुकात रहे। घंटों उनके बीच बातें होती रहीं जो आयकर विभाग …और पढ़ें

द्वारा:कुमार अतुल
टॉपिक:अन्य

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अमर उजाला ब्लॉग

Sanjaya

नमक का नया दारोगा

17 April, 201432 प्रतिक्रियाएँ »

फ्रांस में कहावत है- कभी-कभी सच्चाई बहुत असंभव प्रतीत हो सकती है और इसके ठीक उल्ट कई बार ऐसी असंभव बात भी सच प्रतीत हो सकती है जो कभी हुई न हो। अर्थात कुछ ऐसे झूठ होते हैं जो कि इसलिए सत्य मान ल‌िए जाते हैं क‌ि सभी लोग यह सोचते हैं कि वहां ऐसा …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:राजनीति

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manmohan-sonia

कठपुतली का खेल और पारसी ड्रामा

16 April, 20149 प्रतिक्रियाएँ »

संजय बारू की पुस्तक द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ने सिर्फ उस घटनाक्रम को प्रस्तुत किया है जो एक झीने परदे के पीछे से घटित हो रहा था। कांग्रेस, पीएमओ और अब मनमोहन सिंह की बेटी उपिंदर कौर का बारू की कृति को तथ्यहीन ठहराना और विश्वासघात बताना पारसी थिएटर के ड्रामे से इतर कुछ नहीं। …और पढ़ें

द्वारा:Shyamakant
टॉपिक:राजनीति

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arvind kejriwal slapped - PTI_0

इस थप्पड़ को हल्के में न लें

10 April, 201436 प्रतिक्रियाएँ »

पिछले कुछ समय से नेताओं पर लगातार हो रहे हमलों को किसी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह लोकतंत्र की निराशा और हताशा का प्रतीक है। यह उस झूठे वादे के गुस्से का प्रतीक है, जो नेताओं ने जनता को बेवकूफ बनाने के लिए किए हैं। भूपेंद्र सिंह हुडड्डा से लेकर केजरीवाल पर …और पढ़ें

द्वारा:अंतिमा सिंह
टॉपिक:राजनीति

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रीडर्स ब्लॉग

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न जाने कब होगा सुहाना प्रभात

24 April, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

 छाया ये कैसा घनघोर अन्धकार ।                  न जाने कब होगा सुहाना प्रभात ।।                                            हर तरफ है झूठ और है अत्याचार । जैसे पिसता चककी मे अनाज । वैसे पिस रहा आज इन्सान ।।  छाया ये कैसा घनघोर अन्धकार । न जाने कब होगा सुहाना प्रभात ।।  हर तरफ धोखा है और है भ्रष्टाचार …और पढ़ें

द्वारा:jyoti Hindustani
टॉपिक:विचार

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spiritual_fire_by_NurIzin

अपमान भी गिलास में भरी शराब की तरह है

24 April, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

सालों पुरानी बात है। एक राज्य में महान योद्धा रहता था। कभी किसी से नहीं हारा था। बूढ़ा हो चला था, लेकिन तब भी किसी को भी हराने का माद्दा रखता था। चारों दिशाओं में उसकी ख्याति थी। उससे देश-विदेश के कई युवा युद्ध कौशल का प्रशिक्षण लेने आते थे। एक दिन एक कुख्यात युवा …और पढ़ें

द्वारा:ganeshpa
टॉपिक:अन्य

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spiritual-development

बेहतरीन सफलता के लिए ये बातें जरूरी हैं व्यक्तित्व में

24 April, 20141 प्रतिक्रिया »

इंसानों में जितने भेद होते हैं उनमें एक बड़ा भेद रुचि का होता है। अभिन्न मित्रों में भी भिन्न रुचियां पाई जाती हैं। एक ही माता-पिता की संतानों की रुचियां अलग-अलग होती हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा उस व्यक्ति-परिस्थिति से तालमेल हो जाना ही रुचि है। बेहतर तालमेल ही रुचि में बदल जाता है। जिस …और पढ़ें

द्वारा:ganeshpa
टॉपिक:अन्य

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kejriwal-modi-rahul

तैयार हो जाइये धर्म, जाती समुदाय की राजनीति देखने को

24 April, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

  चल रहे इस चुनावी माहौल में सभी नेताओ ने तो बहुत वादे कर दिए है पर सारे वादे कसी एक विशेष धर्म , जाति , समुदाय को लक्ष्य बना कर किये गए है . क्योकि किसी नेता जी ने कहा की हम मुस्लिमो को विशेष अधिकार देंगे तो किसी ने कहा की हम हिन्दुओ …और पढ़ें

द्वारा:GOVIND KUMAR
टॉपिक:समाज

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Migraine

महिलाओं में कैल्शियम की कमी

24 April, 2014कोई प्रतिक्रिया नहीं »

भारत में आम तौर पर स्त्रियां घर का सारा काम संभालती हैं. समाज में विवाह से पहले घर में माँ का हाथ बटाने वाली लड़कियां अच्छी मानी जाती हैं . विवाह के बाद वे अपना सारा समय घर के सभी लोगों का ध्यान रखने में लगाती हैं .वैसे ये बात बहुत अच्छी होती है क्योंकि …और पढ़ें

द्वारा:Dr.Swastik Jain
टॉपिक:विचार

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