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Chandigarh_Monument

आजाद खयाल महिलाएं

23 March, 2015

फेसबुक पर रचनाकारों की बाढ़ सी आ गई है। महिला लेखिकाएं खासतौर पर मुखर हैं। फेसबुक पर एक कविता पढ़ रहा था (किसकी है पता नहीं)। पर उसके कथ्य ने चौंकाया। कविता एक कामकाजी औरत पर फोकस है। उसमें बड़े ही बोल्ड और बिंदास अंदाज में उसमें उस महिला के पीरियड्स (मासिक धर्म) के दिनों, …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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Bihar_2346525e

बदहाल शिक्षा, बरबाद परीक्षा

23 March, 2015

पिछले दिनों इंटरनेट से लेकर अखबारों और टीवी चैनलों पर बिहार के एक बहुमंजिले इंटर कालेज के पीछे की दीवार में बनी खिड़कियों और छज्जों से लटके दर्जनों लोगों की तस्वीरें वायरल हुईं। ये लोग दूसरी और तीसरी ंमंजिल की खिड़कियों से भी जान हथेली पर लिये लटके थे। जानते हैं क्यों, ंअंदर कमरों में …और पढ़ें

टॉपिक:विचार

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sperrow

आजा चिड़िया आ जा री

20 March, 2015

आज विश्व गौरेया दिवस मना रहा है। वर्ल्ड स्पेरो डे। मीठे कलरव से नींद खुले ऐसा अब होता नहीं। कोई चिड़िया अब घर में आकर नहीं चहचहाती। घड़ी का बेसुरा अलार्म अब हमारी नींद तोड़ता है। अपनी इस हालत के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। चिड़िया हमारी जिंदगी का हिस्सा थी। चिड़िया हमारे बचपन का …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:अन्य

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अमर उजाला ब्लॉग

nepo

भाई-भतीजावाद के पर्दे में दम तोड़ते तथ्य और सत्य

31 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान पीजीआई आरोपों के घेरे में है। आरोप ये हैं कि परिवारवाद और भाई-भतीजावाद जड़ें जमाए बैठा है। इस पर गौर करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस सबका खामियाजा वे मरीज भी भुगतते हैं, जो बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। पीजीआई के डायरेक्टर की बेटी और दामाद की असिस्टेंट प्रोफसर पद पर एडहॉक …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:समाज

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Atalji1

कैसा लग रहा हूं मैं…

30 March, 20152 प्रतिक्रियाएँ »

अभी तस्वीरें मीडिया में बाहर नहीं आई हैं। मन में उत्सुकता है, कैसे लग रहे होंगे भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी भारत रत्न का तमगा हाथ में लेकर, क्या प्रतिक्रिया होगी। कभी जिस शख्स का भाषण सुनने के लिए लोग लालायित रहते थे। पता लग जाता था तो उनके जादुई शख्सीयत से खिंचकर मीलों-मील …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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dog

कुत्ता काटे तो अब खबर है…

28 March, 20151 प्रतिक्रिया »

कुत्ता काटे तो खबर नहीं। आदमी कुत्ते को काटे तो खबर है। न्यूजरूम के लिए खबर की यह परिभाषा अब बेमानी हो गई है। ट्राइसिटी की सड़कों पर और पार्कों में भटकते करीब 20 हजार स्ट्रे डॉग्स के आतंक ने इस परिभाषा को बदला है। इनमें आधे सिर्फ चंडीगढ़ की सड़कों पर हैं। राहगीरों-बच्चों पर …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:समाज

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nepo

भाई-भतीजावाद के पर्दे में दम तोड़ते तथ्य और सत्य

31 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान पीजीआई आरोपों के घेरे में है। आरोप ये हैं कि परिवारवाद और भाई-भतीजावाद जड़ें जमाए बैठा है। इस पर गौर करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस सबका खामियाजा वे मरीज भी भुगतते हैं, जो बड़ी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। पीजीआई के डायरेक्टर की बेटी और दामाद की असिस्टेंट प्रोफसर पद पर एडहॉक …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:समाज

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arvind

अरविन्दजी-आप तो ऐसे न थे…

30 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अरविन्द केजरीवाल, चेहरा सामने आते ही एक ऐसे शख्स की तस्वीर सामने आती हैं जो स्वराज, भ्रष्टाचार मिटाने, लोकपाल की बात करता हैं| लेकिन सत्ता का सुख चखते ही क्या व्यक्ति बदल जाता हैं| अंग्रेजी में एक कहावत  भी हैं… Power corrupts, absolute power corrupts absolutely. अरविन्द ने जनता के दिलों को छुआ| आम आदमी …और पढ़ें

द्वारा:BEENA RAUTELA
टॉपिक:राजनीति

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indian_politics

अब्तर की आग पर सियासत की रोटी

30 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

राजस्थान के किसान दिल्ली और जयपुर के हुक्मरानों से अत्फ़ की भीख मांग रहे है. गगन से आई तबाही ने हमारे चेहरे की तबस्सुम छीन ली है. आसमानी ओले ने गुलजार चमन को उजाड़ दिया है. किसान चीख रहे है, कोई है जो इस बगिया को गुलजार कर दें. कोई है जो आंखों के सामने …और पढ़ें

द्वारा:MUNESHWAR KUMAR
टॉपिक:हास्य

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NITISH MODI MEETS

ये मुलाक़ात एक बहाना है…

30 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

नीतीश इन दिनों दिल्ली की गलियों में खाक छान रहे है। दर दर जाकर मुलाकात कर रहे है। मुलाक़ात का ये सिलसिला 7 RCR के आंगन से शुरु हुई है। जिसके निजाम़ से पूरानी दोस्ती थी, जो दो साल पहले दुश्मनी में बदल गई थी। लेकिन सियासी मैदान पर न तो कोई स्थाई दुश्मन होता …और पढ़ें

द्वारा:MUNESHWAR KUMAR
टॉपिक:राजनीति

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modi-kejri

नेताओं को मितभाषी होने की जरूरत

30 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

देश में चाहे चुनावी माहौल हो या कोई और समय , राजनैतिक दलों और नेताओं के बीच हमेशा ही आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहता है । अब ये तो जैसे अपने देश की परंपरा ही हो गयी है। इन दलोँ के नेताओं की जुबान तो जैसे फिसलती ही रहती है , वे कब , …और पढ़ें

द्वारा:Manoj Kumar Srivastava
टॉपिक:राजनीति

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