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निजीकरण के दौर में सरकारी स्कूल

7 April, 2016

जावेद अनीस सरकारी स्कूल हमारे देश के सावर्जनिक शिक्षा वयवस्था की बुनियाद हैं, ये  देश के सबसे वंचित  व हाशिये पर  पहुंचा दिए गये समुदायों की शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. देश की  शिक्षा वयवस्था के निजीकरण और  इसे  मुनाफा आधारित बना डालने का मंसूबा पाले लोगों के रास्ते में भी सरकारी स्कूल सबसे बड़ी रूकावट हैं. …और पढ़ें

द्वारा:anisjaved
टॉपिक:शिक्षा

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अपनी ही पार्टी के कीर्तिमान को ध्वस्त करने की कसम ली ‘आप’ पंजाब कार्यकर्ताओं ने

7 April, 2016

आम आदमी पार्टी की राजनीति के आगे राजनीति के पंडितों के तमाम राजनीतिक समीकरण ध्वस्त होते जा रहे हैं. राजनीति के धुरंधर हैरान हैं कि ‘आम आदमी पार्टी’ लोगों के दिलो दिमाग में कैसे इस तरह छा रही है। पंजाब के कार्यकर्ताओं का जोश व जुनून इसी बात से आंका जा सकता है कि उन्होंने …और पढ़ें

द्वारा:Gopal Sharma
टॉपिक:राजनीति

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ध्यान देना जरुरी है

7 April, 2016

महिलाएं हमारे विस्तृत समाज का अर्ध अभिन्न अंग हैं और उनकी सुरक्षा और समृधि आज के समय में सबसे ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दा है उदाहरण के तौर पर जब भी हम अखवार देखते हैं 5 या 6 खबरें महिलाओं के शारीरिक या मानसिक शोषण की पढने में आती हैं जो की बिलकुल अच्छा नहीं है …और पढ़ें

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अमर उजाला ब्लॉग

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चालीस साल से प्रकृति के संरक्षण की मशाल थामे है करोड़ा सिंह का परिवार

4 April, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

समय तो बहुत बदल गया है। खेत और खलिहान की जगह सेक्टर बन गए हैं। चिड़ियों के झुंड अब कहां दिखते हैं। मगर डड्डूमाजरा के करोड़ा सिंह के परिवार की नींद अब भी चिड़ियों के चहचहाने से ही खुलती है। चैत के इस महीने में तो उनके आंगन में हर समय चिड़ियों को एक-दूसरे का …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:समाज

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सूखी नहर में वोटों की खान

23 March, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

सुधीर राघव सतलुज यमुना लिंक नहर में पिछले तीन दशक से पानी नहीं, सिर्फ राजनीति बह रही है। पंजाब में जब भी चुनाव नजदीक होते हैं, हरियाणा और पंजाब के नेताओं के बीच जुबानी तीर चलने लगते हैं। इस सूखी नहर से खबरों की बाढ़ निकलती है। अगले साल पंजाब में चुनाव होने हैं। एसवाईएल …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:विचार

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रेल बजट का विज्ञान

26 February, 20166 प्रतिक्रियाएँ »

सुधीर राघव जनता जरूरतों की पटर‌ियां बिछाती है। कुछ पटर‌ियां खुशनसीब होती हैं। रेल बजट में उन पर रेल चलती है। बाकी पटरियां लोग समेट कर या तो अगले बजट के लिए रख लेते हैं या धरना-प्रदर्शन के काम आती हैं। प्रभु ने इस बजट में कैसी रेल चलाई है? यह समझना हर किसी के …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:विचार

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रीडर्स ब्लॉग

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अब तो अरुणोदय हो.

7 April, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अब तो अरुणोदय हो. नूतन सूर्य उदय हो. – उदयाचल से दिगदिगन्त तक फैली अभिनव लालिमा दीप करो विश्राम ज्योति से अधिक तुम्हारी कालिमा शरणापन्न तिमिर से रण का अब न अधिक अभिनय हो अब तो अरुणोदय हो. नूतन सूर्य उदय हो. – अब तो धूप धरा पर उतरे चढ़ किरणों की पालकी फिर आँगन …और पढ़ें

द्वारा:Achyutam Keshvam

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प्रभावशाली समुदायों का आरक्षण राग

7 April, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

जावेद अनीस जाट आरक्षण आंदोलन फिलहाल आगामी तीन अप्रैल तक के लिए टल गयी है, इसी के साथ  ही जाट नेताओं ने हरियाणा सरकार को एक नयी डेडलाइन देते हुए कहा है कि वह 31 मार्च तक चलने वाले विधानसभा के मौजूदा सत्र में आरक्षण विधेयक पारित कराये । अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति …और पढ़ें

द्वारा:anisjaved
टॉपिक:राजनीति

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मुज़फ्फरनगर से उपनगरीय रेल सेवा

7 April, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत बसे मुज़फ्फरनगर से हजारों की संख्या में यात्री मेरठ, मोदीनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, रुड़की, हरिद्वार आदि स्थानों पर आते-जाते है। यह शहर रेल मार्ग व सड़क मार्ग से इन स्थानों से भली-भांति जुड़ा है। परन्तु मुजफ्फरनगर बाई-पास बन जाने के कारण अंतर्राज्जीय बसें शहर के बाहर से ही निकल जाती …और पढ़ें

द्वारा:satish Mittal

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चकुला बोला माँ से ये तो बहुत बड़ा है

7 April, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

अरे!धनुर्धर लक्ष्य वेध तब ही तो होगा जब खिंची हुई इच्छा की प्रत्यंचा छोड़ोगे – तबतक जप-तप और याग से क्या होना है राग-द्वेष के बादल जबतक नहीं फटेंगे गंगा मैया कितने पापों को धोएगी अगर दिलों के खाई-खन्दक नहीं पटेंगे ये दर-दर पर शीश झुकाना बहुत हो गया जो उसपार चले सो दौलत कब …और पढ़ें

द्वारा:Achyutam Keshvam
टॉपिक:कला

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श्री भगवान जी से वार्तालाप

7 April, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

विचारों के अंतर्द्वंद पर नींद हावी हो गई थी। मैं गहरी नींद में सो चुका था। कुछ समय बाद एक अजीब सी रोशनी हुई एवं नींद में ही एक आवाज़ सुनाई दी; पूछो वत्स! मैं तुम्हारी शंका दूर करने आया हूँ। प्रणाम भगवन, अचानक मेरे होंठों से यह शब्द निकले। श्री भगवान जी: पूछो पुत्र! …और पढ़ें

द्वारा:Govind Chandhok

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