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फीचर्ड ब्लॉग

नरेंद्र मोदी

तंगहाल नागरिक निराशा के मध्य सूट-ऑक्शन

25 February, 2015

[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_लोकपथ नीलामी की भाषा नहीं जानता। मेरे देश में आज भी आधी टांग की धोती पहने कितने गांधी अपने सत्य की राह पर सन्नद्ध हैं। एक ‘सूट’ से परिवार भर की शादी करने को मोहताज है आज भी समाज का एक तपका। दरजी ने जो सूट सिला वह इतिहास का दस्तावेज बनकर पुश्तैनी …और पढ़ें

द्वारा:YATINDRA NATH CHATURVEDI
टॉपिक:अन्य

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janta rocks in delhi

सावधान! जनता मूड में है

25 February, 2015

पिछले कई दशकों से राजनेता ये शिकायत करते आए थे कि स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से वह कुछ कर नहीं पाते। इसलिए अब जनता ने फैसला कर लिया है की वो इनकी इस शिकायत को दूर करके देखेगी इसलिए पहले यू. पी. में अखिलेश यादव को फिर नरेंद्र मोदी को जनता ने प्रचंड बहुमत दिया। …और पढ़ें

द्वारा:Pravin Dubey
टॉपिक:राजनीति

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mother-teresa

तोल-मोल के बोल…

24 February, 2015

संघ बेशक भारतीय सनातन संस्कृति की दुहाई देता फिर रहा हो लेकिन कई बार लगता है कि वह खुद अपनी करनी में इसका पालन करता नहीं दीखता। शास्त्रों में कहा गया है सत्यम ब्रूयात, प्रियम ब्रूयात, मा ब्रूयात सत्यम अप्रियम अर्थात सत्य बोलो, प्रिय बोलो मगर अप्रिय सत्य भी मत बोलो। संघ प्रमुख  मोहन भागवत …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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अमर उजाला ब्लॉग

obama

ओबामा, दिलशाद की मौत और उम्मीदें

27 January, 201526 प्रतिक्रियाएँ »

ओबामा भारत आए। अच्छे मेहमान बने। मोदी के गले लगे। गणतंत्र दिवस परेड देखकर खुश हुए। तालियां बजाईं। शाहरुख खान का डायलॉग बोला, मिल्खा सिंह और मैरीकाम के योगदान को याद किया। हम सब बेहद प्रसन्न हैं कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को इतनी तवज्जो दी। लेकिन जिस बात पर सबसे ज्यादा गौर करने …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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pk

पीके- नई जुबान में कबीरबानी

22 December, 201448 प्रतिक्रियाएँ »

मेरे मन में तो बहुधा आता है, आपके मन में भी जरूर आता होगा कि कबीर आज जिंदा होते और अपनी उसी ठसक में बात करते जैसी पांच सौ साल पहले कही थी. तो क्या होता? मौजूदा दौर में इसकी कल्पना भी सिहरा देती है। कोई खुदा का नाम लेकर उनके पीछे पिल पड़ता तो …और पढ़ें

द्वारा:kumar atul
टॉपिक:अन्य

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fish

मछली और मजहब

18 December, 20147 प्रतिक्रियाएँ »

एक छोटी मछली बहुत दुखी थी। मां रोज सुबह सजा संवार कर उसे स्कूल भेजती। यहां तक सब ठीक था। दुख उसके बाद शुरू होता। क्लास में टीचर उसे खड़ा कर लेती- बताओ भाप का इंजन किसने बनाया? वह चुपचाप सिर नीचे झुका लेती। उसे फटकार पड़ती। तमाचे पड़ते। वह खुद को दुनिया का सबसे …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:साहित्य

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रीडर्स ब्लॉग

eyeee

अकेलापन पुरुष का :ज्यादा घातक

2 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

  अकेलापन एक ज़हर के सामान होता है किन्तु इसे जितना गहरा ज़हर नारी के लिए कहा जाता है उतना गहरा पुरुष के लिए नहीं कहा जाता जबकि जिंदगी  का अकेलापन दोनों के लिए ही बराबर ज़हर का काम करता है .नारी  जहाँ तक घर के बाहर की बात है आज भी लगभग पुरुष वर्ग …और पढ़ें

टॉपिक:समाज

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gh

न्याय बिकता है..

2 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

“न्याय बिकता है ” एक अति लघु नाटक है जो वर्तमान में न्याय के उड़ते मखोल पर चोट करता है | न्याय का बाज़ार सजा हुआ है | पैसा है तो खरीद लो इसे, पॉवर है तो छीन लो इसे | ये उन गरीबों के लिए नहीं है जो १०० की चोरी पर १००० कोड़े …और पढ़ें

द्वारा:Anuj Agarwal
टॉपिक:राजनीति

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देश में दलहन और तिलहन की दशा को बेहतर करने का सुझाव

प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को सुझाव

2 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी, / रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी , देशहित एवं जनहित में एक सुझाव आपके समक्ष पेश है – रेल लाइन की पटरियों की खाली पड़ी जमीनों को ऐसे भूमिहीन और जरुरतमंद लोंगों को आवंटन के जरिये कृषि कार्य के लिए देने की ब्यवस्था की जाय, जिसमें वह तिलहन और …और पढ़ें

द्वारा:abhinavanand
टॉपिक:अन्य

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प्रतिस्पर्धात्मक संघीय भारत -क्या होगा त्वरित विकास

2 March, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

कम्पेटेटिव फेडरलिस्म यानी प्रतिस्पर्धात्मक भारतीय संघ। कल मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य कर्मचारी संघ के एक अधिवेशन में बोलते हुए जो बात कही उसने मेरा ध्यान आकर्षित किया है। केंद्र की एनडीए सरकार ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ” विकास मार्ग ” के जिन वैकल्पिक सूत्रों पर काम शुरू किया है ,यह उनमे से …और पढ़ें

द्वारा:S.Aryaji
टॉपिक:अन्य

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18sep3

पूंजीपतियों का बजट

28 February, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

चुनावों मे बड़े बड़े पूंजीपतियों से लिये हज़ारों करोड़ रुपए के चंदे का कर्ज़ मोदी जी ने चुका दिया है| आम आदमी से तो अभी उन्हे अगले चार साल तक कुछ काम पड़ना नही है इसलिये उसकी चिंता करना अब वो छोड़ चुके है| उसे बहलाने के लिये उनके पास प्रभावशाली भाषण देने की कला …और पढ़ें

द्वारा:Arvind Garg
टॉपिक:अन्य

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