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मेरा भारत देश महान

27 January, 2016

सरल स्वभाव मीठी वाणी , आध्यमिकता के गूंजते शंख नाद यहाँ अनेकता में एकता का प्रतीक मेरा भारत देश महान , विभिन्न रंगों के मोती हैं  ,फिर भी माला अपनी एक हैं मेरे देश का अद्भुत वर्णन ,मेरी भारत माँ का मस्तक हिमालय के ताज से सुशोभित सरिताओं में बहता अमृत यहाँ, जड़ी -बूटियों संजिवनियों …और पढ़ें

द्वारा:Ritu Asooja

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prices-droping

अर्थ

22 January, 2016

सुधीर राघव अर्थ व्यवस्था प्रगत‌ि पर है। साल भर से हम यही सुन रहे थे। बजट बांछें खिलाने वाला होगा। यह उम्मीद भी अंगड़ाई लेकर अपने जवान होने की घोषणा कर रही थी। पर ऐन मौके पर जहां पानी कम था वहीं किश्ती अटकने की घोषणा कर दी गई। नेताओं ने अपने पतवार चाटुकारों की …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:हास्य

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Restructuring-UGC-among-top-100-priorities-of-Smriti-Irani

आदरणीय स्मृति ईरानी जी …………………..

18 January, 2016

आदरणीय स्मृति जी,मैं यह पत्र न तो राजनीति से प्रेरित हो कर लिख रहा हूँ न ही मेरी राजनीति में कोई दिलचस्पी है। मैं तो सिर्फ नीति और ईश्वर में विश्वास रखता हूँ। जिस देश की शिक्षा नीति, आर्थिक नीति एवं सुरक्षा नीति स्वस्थ हों वो देश सदा उन्नत्ति की और अग्रसर रहता है। विडम्बना …और पढ़ें

द्वारा:Govind Chandhok
टॉपिक:अन्य

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अमर उजाला ब्लॉग

What-Happens-In-Spring

वसंत की गुदगुदी

6 February, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

-सुधीर राघव वसंत आ गया है। कव‌ियों के मन में गुदगुदी हो रही है। लेखक खेतों की ओर निकल गए हैं। फोटोग्राफर बगीचों और वादियों में तिपाई टिकाए कैमरे पर आंख गड़ाए हैं। महिलाएं शॉपिंग के लिए तैयार हो रही हैं। डिजाइनरों की नई-पुरानी पीढ़ी अपना स्प्रिंग कलेक्शन लांच करने को मॉडलों से अनुबंध कर …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:हास्य

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terrorist

बार बार बमियाल

4 January, 20161 प्रतिक्रिया »

सुधीर राघव पांच महीने में यह दूसरा मौका है जब जम्मू-कश्मीर से सटे पंजाब के इलाके में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने घुसपैठ की है। गत जुलाई में दीनानगर आतंकी हमले की जांच में भी यह सामने आया था कि घुसपैठ बमियाल के पास उज्ज दरिया से सटे रास्ते से हुई। इस बार भी आतंकवादियों की उपस्थिति …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:विचार

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मुंह में राम बगल में रिश्वत

25 December, 201516 प्रतिक्रियाएँ »

सुधीर राघव हे वत्स! सब नेताओं की नीति एक है। भले ही इनकी पार्टी अलग-अलग है। भले ही इनके झंडे अलग-अलग हैं। भले ही इनकी टोपियां अलग-अलग हैं। भले ही इनके चुनाव चिन्ह भी अलग हैं। तू इनका झंडा, इनकी टोपी, इनका चिन्ह और इनके नाना प्रकार के रंग देखकर भ्रम‌ित मत हो। ये मन …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:हास्य

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What-Happens-In-Spring

वसंत की गुदगुदी

6 February, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

-सुधीर राघव वसंत आ गया है। कव‌ियों के मन में गुदगुदी हो रही है। लेखक खेतों की ओर निकल गए हैं। फोटोग्राफर बगीचों और वादियों में तिपाई टिकाए कैमरे पर आंख गड़ाए हैं। महिलाएं शॉपिंग के लिए तैयार हो रही हैं। डिजाइनरों की नई-पुरानी पीढ़ी अपना स्प्रिंग कलेक्शन लांच करने को मॉडलों से अनुबंध कर …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:हास्य

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Apricot_tree_flowers

अंगुलियाँ/ दीपक मशाल

2 February, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

रेलिंग का सहारा लेकर उसने किसी तरह धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ीं और साक्षात्कार कक्ष के बाहर जा पहुँची। अभी भी बारह मिनट शेष थे। पहले बैंच पर बैठकर दो मिनट को सुस्ताया फिर एक हाथ से बैग से पानी की बोतल निकाली और दूसरे से रूमाल, लगभग एक साथ ही माथे पर आये पसीने को पोंछा। वहाँ उसके अतिरिक्त दो पुरुष प्रतिभागी पहले …और पढ़ें

द्वारा:DipakMashal

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पुत्तन चाचा का पश्चाताप…!!

2 February, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

पुत्तन चाचा का पश्चाताप…!! जीवन संध्या पर पुत्तन चाचा पश्चाताप की आग में झुलस रहे हैं। कुनबे का मुखिया होने से घर – परिवार में उनकी मर्जी के बगैर कभी कोई पत्ता न हिलता था , न अब हिलता है। चचा को गम है कि उन्होंने कुछ गलत फेसले किए। परिवार का होनहार पप्पू इंजीनियरिंग …और पढ़ें

द्वारा:tarkeshkumarojha
टॉपिक:साहित्य

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come

बहुत सहा है ताण्डव नर्तन। कुछ दिन और सहो मेरे मन।

27 January, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

प्रसव वेदना है यह जिससे, समय सिंहनी चींख रही है। – भले रुदन से जग थर्राया। लगे धरा पर ही अघ आया। ऊँचे अम्बर से पौरुष की , माँग धरित्री भींख रही है।(1) – काली रात घिरा अँधियारा। लड़ते-लड़ते दीपक हारा । छिपी हार में जीत पूर्व में, पौ फटती सी दीख रही है। प्रसव …और पढ़ें

द्वारा:Achyutam Keshvam
टॉपिक:अन्य

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Flowering plum tree1

क्या पता होने लगे कब आग की बरसात

27 January, 2016कोई प्रतिक्रिया नहीं »

सोचकर ही इस शहर में घर बनाना जी क्या पता होने लगे कब आग की बरसात – हो सके तो रे पखेरू दूर उड़ जाना नीड़ मत धरना यहाँ पर गीत मत गाना सोचकर इस बाग में रमना-रमाना जी टोह में कुछ बाज बैठे हैं लगाये घात सोचकर ……………………………(1) – तितलियों रंगीन ख्वाबों में नहीं …और पढ़ें

द्वारा:Achyutam Keshvam

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