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शीला के वो पचास साल

30 May, 2015

दिल्ली के “शीला” टाकीज में विजयानंद चंदोला ने अपने पचास साल गुजारे। गुजारे क्या, शीला टाकीज ही एक तरह से उनकी जिंदगी हो गई। एक बार यहां आए तो फिर कहीं गए नहीं। समय के साथ दिल्ली की आबोहवा बदली, पर वो नहीं बदले। गुरबत ने घर से पलायन करने को मजबूर किया। कहां जाते। …और पढ़ें

द्वारा:वेद विलास
टॉपिक:मनोरंजन

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अरविंद केजरीवाल

चस्केबाज

26 May, 2015

दिल्ली सरकार व् माननीय उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर छिड़ी जंग को देख कुछ शब्द अनायास ही मस्तिष्क में तैर जाते है जैसे नौटंकीबाज, ध्यान आकर्षक कर्ता , ध्यान साधक, चस्केबाज (Attention Seeker), मीडिया लती, चस्की आदि आदि । जब कोई व्यक्ति लोगों का ध्यान बार-बारकेवल अपनी ओर खीचने के लिए बात का बतंगड़ …और पढ़ें

द्वारा:satish Mittal
टॉपिक:मनोरंजन

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अरविंद केजरीवाल

एल जी साहब और राष्ट्रपति जी

26 May, 2015

कल्पना करिये जो ब्यवहार अपने एल जी साहब आजकल कर रहे है ठीक वैसा ही ब्यवहार अपने राषट्रपति जी भी करने लगे तो क्या होगा| तब हर बार विदेश यात्रा पर जाने से पहले मोदी जी को उनकी अनुमति लेनी होगी, फ़्राँस से लड़ाकू विमान का सौदा करने से पहले फाइल राषट्रपति जी से पास …और पढ़ें

द्वारा:Arvind Garg

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अमर उजाला ब्लॉग

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अंतरात्मा को झकझोरने वाली दो घटनाएं

17 May, 20154 प्रतिक्रियाएँ »

शहर में अपराध की दो ऐसी घिनौनी घटनाएं सामने आईं जो किसी की भी अंतरात्मा को झकझोरने के लिए काफी हैं। निशाना बनाया गया मासूम बच्चियों को। रेप और छेड़खानी करने वाले कोई और नहीं बल्कि ऐसे परिचित थे जिन्हें ये मासूम अंकल कहती थीं। एक घटना तो धूर्तता की हद पार कर गई। एक …और पढ़ें

द्वारा:anil trivedi

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सावधान! डोल नहीं बोल रही है धरा

13 May, 20156 प्रतिक्रियाएँ »

धरा कांपती है, क्योंकि वह कुछ कहना चाहती है। मनुष्य के पास सुनने का समय नहीं है। किसी भूगर्भीय हलचल या धरती की बेचैनी की उसे चिंता नहीं। उसकी बस्तियां जमीन से आकाश की ओर बिना सोचे-समझे बढ़ रही हैं। तबाही का मंजर भय पैदा करता है। जो सोच समझ रहे हैं और धरती की …और पढ़ें

द्वारा:सुधीर राघव
टॉपिक:समाज

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इन इमारतों पर क्यों नहीं है निगम की नजर

11 May, 20152 प्रतिक्रियाएँ »

अचानक इमारतें हिलीं तो अफरातफरी फैल गई। बुड़ैल में सोमवार को सुबह भूकंप तो नहीं था लेकिन दहशत वैसी ही थी। नेपाल की त्रासदी से सहमे इलाके के लोगों में वैसा ही हड़कंप मच गया। इमारत पुलिस चौकी के सामने की गली में थी। आनन फानन में पुलिस के साथ-साथ दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन …और पढ़ें

द्वारा:anil trivedi

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रीडर्स ब्लॉग

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केन्द्र टूटेगा अगर तो , परिधि बन आकार लेगा।

26 May, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

सिन्धु जब तपता रहा , आकाश में तब घटा छायी। और बदली ने बिखरकर , भूमि पर सब श्री लुटायी। रज हुई रससिक्त कण-कण, में जगी सौन्दर्यमयता। ले धरा से चेतना, वानस्पतिकता मुस्करायी। केन्द्र टूटेगा अगर तो , परिधि बन आकार लेगा। विश्व रे मेरा विसर्जन , भी सृजन को जन्म देगा। १ – टूटना …और पढ़ें

द्वारा:Achyutam Keshvam
टॉपिक:कला

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तुम्हारी बातों की खुशबू

26 May, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

मिला मोबायल पर संदेश लिखा था तुमने अपनापन तुम्हारी बातों की खुशबू भिगो सी गयी समूचा मन – तुम्हारी बातें शहद-शहद हँसो तो खिलने लगें प्रसून साथ तेरा है पुरवाई जून की लपट लगे सावन – फेर मुहँ पहले जाना दूर ठिठकना फिर पीछे मुड़ना देखना पलक उठा चुपचाप लगे रुक गया यहीं जीवन - …और पढ़ें

द्वारा:Achyutam Keshvam
टॉपिक:कला

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धूल का पर्वत

26 May, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

इस  सृष्टि  मै  , कुछ  भी बेवज़ह  नहीं  , मुझ  से पूछकर मेरी औकात ,   समझकर  धूल मुझे   उड़ा  देने वालों का नहीं है ,कोई कसूर , मै   धूल  जहां पर  बैठती , सब धूंधला  कर देती जिस पर चढ़ी सब धूमिल , कभी घर आँगन में पढ़ी ,मैं धुल जहवां बैठती …और पढ़ें

द्वारा:Ritu Asooja

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मुकम्मल शख्स वही जो खुद दुनिया को बदल डाले

26 May, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

मेरी सफलता की कहानी ———- • रश्मि जोशी , सागर गेट, झांसी, उत्‍तर प्रदेश्‍ा ————————— देश में बेटियों की शिक्षा का स्तर नीचे देख दुख होता है। उम्मीद है जल्द ही बेटियों के खिलाफ लोगों की दकियानूसी मानसिकता का कुंहासा छंटेगा। शिक्षा किस प्रकार लोगों के जीवन को विस्तार देती है यह मैंने स्वयं अनुभव …और पढ़ें

द्वारा:rizwan khan
टॉपिक:अन्य

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तेरे गुम होने का दर्द

26 May, 2015कोई प्रतिक्रिया नहीं »

क्या आपका अभी तक कुछ गुम हुआ है? फॉर एग्जांपल, दिल, पैसे, मोबाइल, मार्कशीट या रूम, अलमारी, ऑफिस, ड्रॉर की चाबी। और इनमें से किसके गुम होने का सबसे ज्यादा अफसोस हुआ या होता है? यही सवाल मैनें अपने एक मित्र महोदय से किया। आंसर के तौर वे तपाक से बोले दिल गुम हुआ है, …और पढ़ें

द्वारा:rizwan khan

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